75 : मुक्त-ग़ज़ल - अपना काम फ़क़त..............




अपना काम फ़क़त समझाना ॥
माने या न माने ज़माना ॥
सत्य को कुछ ने काम चलाऊ ,
झूठ परम आवश्यक माना ॥
होली में कम रंग घोलना ,
कूड़ा कर्कट ही सुलगाना ॥
वायु ध्वनि के घोर प्रदूषण
को मत दीपावली मनाना ॥
मैं महलों का हूँ कारीगर ,
पर अचरज ख़ुद हूँ बेठिकाना ॥
भूखी बस माँ ही बच्चे को ,
दे सकती है अपना खाना ॥
बेमतलब आना महबूब का ,
आते ही जो रटता जाना ॥
केवल धाक जमाने घर में ,
ग़ैर ज़रूरी कुछ मत लाना 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Ghanshyam kumar said…
बहुत सुन्दर रचना...!!
धन्यवाद ! Ghanshyam kumar जी !

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