67 : मुक्त-ग़ज़ल - मुझसे तो तेरे बिना...........


मुझसे तो तेरे बिना अब न जिया जाएगा ॥
लहजा ब लहजा मरा सिर्फ़ मरा जाएगा ॥
मेरे मरने से तेरे फ़ायदे की सच है ख़बर ,
तो बिना जाँ न दिये मुझसे रहा जाएगा ॥
नर्म ख़्वाबों की ओट लेके ज़िंदगी कब तक ,
आख़िरश सख़्त हक़ीक़त से बचा जाएगा ॥
बंद कर बंद कर ये रहमो करम आज अभी ,
और एहसान तले अब न दबा जाएगा ॥
तेरे क़दमों से क़दम कंधे से मिला कंधा ,
तू हिरण कछुआ मैं हरगिज़ न चला जाएगा ॥
तंग फाकों से बहुत आके ही ख़रीदा ज़हर ,
पेट की आग में लंबा न जला जाएगा ॥
सिर तेरा देखने में टोपियाँ गिरें सिर की ,
इतनी ऊँचाइयों पे किससे चढ़ा जाएगा ॥
मुझसे सीखा है जो एक एक पैंतरे बाज़ी ,
उससे बाज़ी मैं लगाऊँ तो हरा जाएगा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

कहानी : एक नास्तिक की तीर्थ यात्रा