गीत : 3 - इश्क़ करता हूँ.....................


इश्क़ करता हूँ मैं , प्यार करता हूँ मैं ॥
उनसे कैसे कहूँ उनपे मरता हूँ मैं ?
इश्क़ करता......................................
खिलते चेहरे से कुछ भी पता न चले ,
दर्दे दिल कोई कैसे मेरा जानले ?
अपने यारों से भी कुछ न कहता हूँ मैं ॥
उनसे कैसे कहूँ उनपे मरता हूँ मैं ?
मेरी तन्हाइयों में गुजर देखिये ,
इश्क़ का मुझपे तारी असर देखिये ,
आतिशे हिज़्र में धू धू जलता हूँ मैं ॥  
उनसे कैसे कहूँ उनपे मरता हूँ मैं ?
मेरे दिल की उन्हें कैसे होगी ख़बर ,
मेरा क़ासिद यहाँ कोई होता अगर ,
प्यार की चिट्ठियाँ रोज़ लिखता हूँ मैं ॥
उनसे कैसे कहूँ उनपे मरता हूँ मैं ?
इश्क़ करता हूँ मैं , प्यार करता हूँ मैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Shiv Raj Sharma said…
क्या बात है सर
धन्यवाद ! Shiv Raj Sharma जी !

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