*मुक्त-मुक्तक : 134 - उसके दर्दे दिल...............

उसके दर्दे दिल जिगर की मैं दवा बनकर रहूँ ॥
गर्मियों की लू लपट में सर्द हवा बनकर रहूँ ॥
यों मुझे देता है वो बस दर्दो ग़म रंजो अलम ,
वो मेरा है इसलिए उसका मज़ा बनकर रहूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति  


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