*मुक्त-मुक्तक : 133 - मैं कब दीद के क़ाबिल


मैं कब दीद के क़ाबिल फ़िर भी तकते मुझे रहो !
क्यों करते हो मुझसे इतना ज़्यादा प्यार कहो ?
मेरे रूप रंग पर भूले पड़ती अगर नज़र ,
दुनिया करती है छिः छिः तुम वा वा अहो अहो ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

sriram said…
wah...kya khub khi hai...shi hai...shi hai

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