*मुक्त-मुक्तक :130 - गिरा नज़रों से भी............


गिरा नज़रों से भी हूँ 
और दिल का भी निकाला हूँ ॥
यक़ीनन हूँ बुझा सूरज
 पिघलता बर्फ काला हूँ ॥
समझते हैं जो ऐसा आज 
वो कल जान जाएँगे ,
मैं तल का मैक़दा हूँ 
या हिमालय का शिवाला हूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

shishir kumar said…
Talka maekada hun ya himalay ka shiwalahun"
Bahut sundar Dr sahab
धन्यवाद ! shishir kumar जी !

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