*मुक्त-मुक्तक : 128 - यकीनन लाख झूठा..........


यक़ीनन लाख झूठा हो 
मगर सच्चा ही लगता है ॥
बड़ा हो जाये बेटा 
बाप को बच्चा ही लगता है ॥
किसी से भूलकर 
कर मत बुराई उसके बच्चे की ,
किसी का भी हो बच्चा 
उसको वो अच्छा ही लगता है ।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Brijesh Singh said…
बहुत सुन्दर!

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