*मुक्त-मुक्तक : 125 - तस्वीर पे न.............


तस्वीर पे न जाना 
तस्वीर सच न बोले ॥
खूँख़्वार दरिंदे भी 
लगते हैं इसमें भोले ॥
इंसान से मिलकर भी 
अब कुछ पता चले न ,
ओढ़े हैं उसने कितने
 चेहरे पे अपने चोले ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Comments

Brijesh Singh said…
सच कहा! बहुत सुन्दर!
Pratibha Verma said…

बहुत सुन्दर ...
पधारें "चाँद से करती हूँ बातें "
धन्यवाद ! Brijesh Singh जी !
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक