*मुक्त-मुक्तक : 123 - इस तरह मेरी................


इस तरह मेरी न कर 
खुल के तरफ़दारी तू ॥
हूँ गुनहगार तो कर 
बढ़के गिरफ़्तारी तू ॥
तेरी ईमानदारियों पे ही तो 
क़ुर्बाँ हूँ ,
फर्ज़ की राह पे
 क़ुर्बान कर दे यारी तू ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर ...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

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