*मुक्त-मुक्तक :122 - जब तलक थे............




जब तलक थे 
तेरे दिल के बादशा हम ॥ 
थे ,यूँ लगता था 
ख़ुदाई के ख़ुदा हम ॥ 
तेरी नज़रों से गिरे ,
दिल से फिंके तो ,
चलते फिरते हो गए 
मुर्दा मुदा हम ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

बहुत सुन्दर
धन्यवाद ! Lekhika 'Pari M Shlok' जी !

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