*मुक्त-मुक्तक : 121 - किससे बुझाऊँ आग.........


 किससे बुझाऊँ आग 
कि पानी ही जल रहा ॥
करता है जो इलाज 
वो बीमार चल रहा ॥
ग़ैरों पे एतबार का 
उठता कहाँ सवाल ,
अपनों को जबकि अपना ही 
हँस हँस के छल रहा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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