*मुक्त-मुक्तक : 119 - मुफ़्त मिले तो...............


मुफ़्त मिले तो पीलूँ दारू
 मटका भर भर कर ॥
गर खरीद पीना हो पानी 
पीऊँ न चुल्लू भर ॥
डॉलर पौंड कमाऊँ 
ख़र्चा करूँ न इक रुपया ,
कपड़ा मिल का मालिक हूँ मैं 
रहूँ दिगंबर पर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

sriram said…
दिल से रची रचना ,सुन्दर ही होती है .

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