*मुक्त-मुक्तक :118 - उसने तक़दीर..................


उसने तक़दीर 
यक़ीनन क़माल पाई है ॥
है तो कछुआ 
मगर हिरनी सी चाल पाई है ॥
काम करता है 
शेरों हाथियों सरीखे मगर ,
शक्लो सूरत ने 
छछूंदर सी ढाल पाई है ॥
डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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