*मुक्त-मुक्तक : 115 - मामुली आंच से............


मामुली आँच से 
लोहा गलता नहीं ॥
ग्लेशियर सर्दियों में 
पिघलता नहीं ॥
वो यक़ीनन बुरी तरह 
बेहोश था ,
उठके मुर्दा 
ज़मीं पर टहलता नहीं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13-02-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
आभार
धन्यवाद ! दिलबाग विर्क जी !

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