*मुक्त-मुक्तक : 113 - मेरा नुकसां में.................


मेरा 
नुक़साँ में नफ़ा हो जाता ॥
गर जो 
मुझसे वो ख़फ़ा हो जाता ॥
छोड़ अपनी ख़ुदी 
ख़ुशामद की ,
वरना 
उठके वो दफ़ा हो जाता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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