*मुक्त-मुक्तक : 112 - दिल के टूटे तार..............


दिल के टूटे तार में हर अश्क़ के मोती की ठेल ॥
गीत लिखना ग़ज़ल कहना मत समझ शब्दों का खेल ॥
शिल्प, लय, तुक, तान का आसाँ नहीं होता गठन ,
अच्छे अच्छों के दिमाग़ों का निकल जाता है तेल ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Brijesh Singh said…
Beautiful!
Join this site-http://voice-brijesh.blogspot.com
धन्यवाद ! Brijesh Singh जी !

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक