*मुक्त-मुक्तक : 109 - डर है कि टूट..............

डर है कि टूट जाये मेरा 
थोबड़ा न आज ॥
किसने चलाया है ये अजब 
अटपटा रिवाज़ ?
इस तरह 
बेतुकी परम्पराएँ बंद हों ,
रखिये वो अनवरत
 कि जिनपे आपको हो नाज़ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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