*मुक्त-मुक्तक :108 - जो घिनौना है...............


जो घिनौना है उसे 
दूध धुला कैसे कहूँ ?
वो बुरा है तो भला
 उसको भला कैसे कहूँ ?
जो ख़ताओं पे ख़ता करता 
दग़ा खाता फिरे ,
ऐसे अहमक़ को 
गर्म दूध जला कैसे कहूँ ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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