*मुक्त-मुक्तक : 107 - कम बहुत ही..............


कम बहुत ही कम दिखें पर्दानशीं ॥
करते हैं अपनी नुमाइश अब हसीं ॥
कैट-वाकिंग जब वो गलियों में करें ,
मनचलों के दिल की हिल उठती ज़मीं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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