*मुक्त-मुक्तक : 106 - शराबें चूमता ................


शराबें चूमता फिरता 
जहर को चाटता होता ॥
पटक सर अपना दीवारों पे 
ख़ुद को मारता होता ॥
चले जाने के तेरे बाद 
तासिन ख़ुश नहीं रहता ,
अगर तुझको हक़ीक़त में
 वो बंदा चाहता होता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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