*मुक्त-मुक्तक : 104 - न जाने तुम हो................

[ चित्रांकन : डॉ. हीरालाल प्रजापति ] 

न जाने तुम हो क्या ये आज तक
 हम न समझ पाए ॥
मगर जैसे भी हो वैसे
तहे दिल से पसंद आए ॥
कभी बेशक़ न राहों में
 मेरी फूलों को फैलाया ,
तो रोड़े भी कभी भी 
भूलकर न तुमने अटकाए ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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