प्रतीक्षा गीत : 1 - तुम मुझे मत.................


तुम मुझे मत डराओ ये मुमकिन नहीं कि डरकर मैं ये रहगुज़र छोड़ दूँ ॥
जब ये पग जानकर ही उठे इस तरफ़ कैसे मंज़िल को पाये बिगर मोड़ दूँ ?
इश्क़ की सब बलाओं से वाक़िब हूँ मैं , क्या सितम है जफ़ा क्या है मालूम है ,
मुझको कोई नसीहत नहीं चाहिए , प्यार क्या है वफ़ा क्या है मालूम है ,
उनकी फ़ितरत सही बेवफ़ाई मगर मैं वफ़ाओं की क्योंकर क़दर छोड़ दूँ ?
जब ये पग जानकर ही उठे इस तरफ़ कैसे मंज़िल को पाये बिगर मोड़ दूँ ?
संगदिल हों कि हों दरियादिल वो सनम , मुझको उमकी तबीअत से क्या वास्ता ?
मेरी उलफ़त की तासीर की रंगतें उनको दिखलाएंगीं फ़िर मेरा रास्ता ,
मुझको तजवीज़ ये टुक गवारा नहीं मैं कहीं और दीगर जिगर जोड़ दूँ ॥
जब ये पग जानकर ही उठे इस तरफ़ कैसे मंज़िल को पाये बिगर मोड़ दूँ ?
इश्क़ के मैं हरिक इम्तिहाँ के लिए खुद को बैठी हूँ तैयार करके यहाँ ,
ये अलग बात है बख़्त दे दे दग़ा अब भला ज़ोर क़िस्मत पे चलता कहाँ ?
दिल शिकस्ता जो भूले न भूलूँ उन्हें बेबसी में हो सकता है दम तोड़ दूँ ॥
जब ये पग जानकर ही उठे इस तरफ़ कैसे मंज़िल को पाये बिगर मोड़ दूँ ?
तुम मुझे मत डराओ ये मुमकिन नहीं कि डरकर मैं ये रहगुज़र छोड़ दूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर।।
पधारें कैसे खेलूं तुम बिन होली पिया...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !
Ghanshyam kumar said…
बहुत सुन्दर...
जब ये पग जानकर ही उठे इस तरफ़ कैसे मंज़िल को पाए बिगर मोड़ दूँ...
धन्यवाद ! Ghanshyam kumar जी !

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