*मुक्त-मुक्तक : 26 - मेरी सूरत पे................




मेरी सूरत पे ही जाकर 
न तुम अटक जाना ॥ 
मेरी सीरत मेरी फ़ितरत भी 
ग़ौर फ़रमाना ॥ 
इश्क़ के वास्ते 
इक नौजवाँ में जो लाजिम ,
ग़र न मुझमें हों 
तो बेशक़ न करना ठुकराना ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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