*मुक्त-मुक्तक : 32 - शायद ही बेसबब...................


शायद ही बेसबब भी 
रोता हो आदमी ॥ 
घोड़े को अपने सर पर 
ढोता हो आदमी ॥ 
मिट्टी न हो तो ऐसा 
ढूँढे न मिलेगा ,
जो बीज पत्थरों पे 
बोता हो आदमी ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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