*मुक्त-मुक्तक : 40 - सबसे सज़्दा न...............


सबसे सज़्दा 
न सरे आम करो ॥ 
ज्यादा झुक झुक के 
मत सलाम करो ॥ 
सर उठाकर मिलाओ
 हाथ अपना ,
मत खुशामदियों जैसे 
काम करो ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

धन्यवाद ! Nirmal Kumar जी !
sk dubey said…
बहुत सुंदर
धन्यवाद sk dubey जी !

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