*मुक्त-मुक्तक : 37 - धोबी से दूर......................


धोबी से दूर गदहा , 
मटका कुम्हार से ॥
भंगी से दूर झाड़ू , 
चमड़ा चमार से ॥
आती हो शर्म करते 
पुश्तैनी काम जब ,
बैठें न किसलिए फिर 
कुछ रोजगार से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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