*मुक्त-मुक्तक : 39 - लेकर तमाम दर्द...................





लेकर तमाम दर्द दिल में चल मगर न रो ॥ 
चुप चाप बग़ैर आह -  - कराह बोझ ढो ॥ 
इक रोज़ तुझको ज़ाइद-अज़-उम्मीद मिलेगा ,
इतनी ही शर्त है कि ख़ुद को यास में न खो ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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