*मुक्त-मुक्तक : 33 - जो अपना था..............


जो अपना था कभी वो अब है
 ग़ैरों का सनम कहते ॥ 
कलेजा मुंह को आता है 
दग़ाबाज़ी का ग़म कहते ॥ 
ज़हर पी  इंतिज़ारे मर्ग में
 हसरत लिए तड़पूँ ,
निकलता काश उसके 
बाजुओं में अपना दम कहते ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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