*मुक्त-मुक्तक : 31 - पूरे ग़ायब से..................


पूरे ग़ायब से 
नुमूदार क़मर कर दूँ मैं ॥
ख़ुर्द इस गाँव को 
इक सद्र-शहर कर दूँ मैं ॥
कुछ तो काम आऊँ 
कि इस वास्ते बेकार अपनी ,
ये नामुराद 
बाक़ी ज़िंदगी बसर कर दूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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