31. मुक्त-ग़ज़ल : जो पाले नेवले...............


जो पाले नेवले उसको न काले साँप दो भाई ।।
हो जिसके हाथ में पत्थर उसे मत काँच दो भाई ।।
न ऐसे नाक भौं अपनी सिकोड़ो आँख न मींचो,
जो  दिखता हो कोई नंगा उसे बस ढाँप दो भाई ।।
जिन्हें नज्ला-ओ-सर्दी है ये उनको ही मुफ़ीद होगी,
जो गर्मी में सुलगते हैं उन्हें मत आँच दो भाई ।।
अगर करना हो सदक़ा तो वसीयत में दमे आख़िर ,
किसी को अपने गुर्दे और किसी को आँख दो भाई ।।
जला है दूध से इतना कि अब तो एहतियातन वो,
न पीता फूँके बिन चाहे बरफ सा छाँछ   दो भाई ।।
जो करते हैं ज़बरदस्ती हैं दहशतगर्द दंगाई ,
कलम कर उनके सर खम्भों पे लट्टू टाँग दो भाई ।।
न शाएहो सका जो वो मेरा इस आख़िरी दम में,
क़ुरासा  मत पढ़ो दीवान लाकर बाँच दो भाई 
[शाए'=प्रकाशित ;क़ुरासा=पवित्र ग्रन्थ/कुरान ;दीवान=ग़ज़ल संग्रह ] 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 


Comments

मंगलवार 12/02/2013को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं .... !!
आपके सुझावों का स्वागत है .... !!
धन्यवाद .... !!

धन्यवाद Vibha Rani Shrivastava जी !
Sanjeev Mishra said…
न ऐसे नाक भौं अपनी सिकोड़ो आँख न मींचो,
जो दिखता हो कोई नंगा उसे बस ढाँप दो भाई ।।
जिन्हें नज्ला-ओ-सर्दी है ये उनको ही मुफ़ीद होगी,
जो गर्मी में सुलगते हैं उन्हें मत आँच दो भाई ।।
..........अदभुत.....अतुलनीय....अविस्मर्णीय ....क्या रदीफ़ और काफिया लगाया है आपने.....क्या कहने.....
बहुत बहुत धन्यवाद ! Sanjeev Mishra जी !
Anonymous said…
Hmm is anyone else experiencing problems with the pictures on this blog loading?
I'm trying to figure out if its a problem on my end or if it's the blog.
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