*मुक्त-मुक्तक : 17 - खास तक़दीर.............


ख़ास तक़दीर  
हमने  पायी है ॥
ख़ुद की मय 
ग़ैर है  परायी है ॥
लोग पी पी के 
डोल झूम रहे ,
अपने हिस्से में 
प्यास आयी है ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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