*मुक्त-मुक्तक : 34 - जो जी में आए वो मत बक..................



जो जी में आये वो मत बक 

सम्हल-सम्हल कर बोल ॥ 

जब देखो तब कानाफ़ूसी 

कभी तो खुल कर बोल ॥ 

तौबा कर चल झूठ ,

शिकायत ,चुगली-चाटी से ,

सच मौक़ा-ब-मौक़ा सबके 

मुँह पर चलकर बोल ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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