*मुक्त-मुक्तक : 36 - कभी कभी लगता है............


कभी कभी लगता है कभी भी आए न रात ॥
और कभी लगता है कभी न होए प्रभात ॥ 
सब मन की पगलाहट माथे की झक है 
कभी लगे अच्छी मैयत तो कभी बरात ॥ 
-डॉ.हीरालाल प्रजापति

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