Sunday, February 10, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 36 - कभी कभी लगता है............


कभी कभी लगता है कभी भी आए न रात ॥
और कभी लगता है कभी न होए प्रभात ॥ 
सब मन की पगलाहट माथे की झक है 
कभी लगे अच्छी मैयत तो कभी बरात ॥ 
-डॉ.हीरालाल प्रजापति

No comments:

मुक्तक : 583 - हे शिव जो जग में है

हे शिव जो जग में है अशिव तुरत निवार दो ।। परिव्याप्त मलिन तत्व गंग से निखार दो ।। स्वर्गिक बना दो पूर्वकाल सी धरा पुनः , या खो...