39. ग़ज़ल : कंस ना लंकेश........



कंस ना लंकेश जैसे कुनाम मुफ़्त यहाँ ।।
मिलते हैं कान्हा के साथ में राम मुफ़्त यहाँ ।।1।।
गर करोगे काम दिल से तो शर्तिया है मिले ,
सख़्त मेहनत का सिला इन्आम मुफ़्त यहाँ ।।2।।
मातहत हैं वो तेरे जो हैं बंदगी सी करें ,
वर्ना करता आज कौन सलाम मुफ़्त यहाँ ।।3।।
कौन मुँहमाँगी रखे तनख़्वाह पे नौकर ?
मिलते जब आसानियों से ग़ुलाम मुफ़्त यहाँ ।।4।।
जब न थी भरमार तब थे ये आम ; ख़ास बहुत ,
साथ में बिकते थे फ्रिज़ के भी आम मुफ़्त यहाँ ।।5।।
चाहता तुमको बनाना वो रिंदपेशा बड़ा ,
तब तो रोज़ाना पिलाता है जाम मुफ़्त यहाँ ।।6।।
( रिंदपेशा =अत्यंत शराबी /आम =साधारण /आम =एक फल )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति



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