41. मुक्त-ग़ज़ल : रोको मत बह.........................


रोको  मत  बह जाने दो।। 
अश्कों को ढह जाने दो।।

अब क्या डर मरते-मरते ,
सब सच-सच कह जाने दो।।

अपनी जान बचाओ हमें ,
मरने को रह जाने दो।।

दर्द निवारक अब मत दो ,
कुछ गम तो सह जाने दो।।

 छूट गया था जो कल वो ,

आज मिला गह जाने दो।।

पेंट, शर्ट, गंजी  ले लो ,
चड्डी तो रह जाने दो।।

सब कुछ जल भुन गया मेरा ,
मुझको भी दह जाने दो।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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