*मुक्त-मुक्तक : 35 - हंस सभी मैं कौआ........................


हंस सभी मैं कौआ जैसा ॥ 
सब सुंदर मैं हौआ जैसा ॥ 
अपने यारों में लगता हूँ ,
सब बोतल मैं पौआ जैसा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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