Sunday, February 10, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 35 - हंस सभी मैं कौआ........................


हंस सभी मैं कौआ जैसा ॥ 
सब सुंदर मैं हौआ जैसा ॥ 
अपने यारों में लगता हूँ ,
सब बोतल मैं पौआ जैसा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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मुक्तक : 583 - हे शिव जो जग में है

हे शिव जो जग में है अशिव तुरत निवार दो ।। परिव्याप्त मलिन तत्व गंग से निखार दो ।। स्वर्गिक बना दो पूर्वकाल सी धरा पुनः , या खो...