38. मुक्त-ग़ज़ल : क्या दुआओं से..................


क्या दुआओं से हुआ करता है ?
किसलिए फिर तू दुआ करता है ?
ये फ़फोले न दिखा तू बतला ,
क्यों ये अंगार छुआ करता है ?
सिर्फ इंसान अपने अच्छे को ,
अच्छे अच्छों का बुरा करता है ॥ 
मर्ज़ अगर लाइलाज होता है ,
आदमी और दवा करता है ॥ 
उसके हालात तुझसे बदतर हैं ,
फिर भी खुश हाल रहा करता है ॥
एक जीने से बहुत खौफ़ज़दा ,
एक मरने से डरा करता है ॥ 
तीरगी में मशालची की तरह ,
अब तो जुगनू भी लगा करता है ॥ 
मेनका , उर्वशी पे तू क्या है ,
इक मुजर्रद भी मरा करता है ॥
 ( मुजर्रद=ब्रह्मचारी  )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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