Saturday, February 9, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 29 - सारी दुनिया में..................


सारी दुनिया में अमन चैन कैसे क़ायम हो ॥
घर किसी के न कभी भूले कोई मातम हो ॥
सोचता हूँ कि क्या उपाय करूँ मैं जिससे ,
सारे चेहरे खिलें ओ बाग़ बाग़ आलम हो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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मुक्तक : 583 - हे शिव जो जग में है

हे शिव जो जग में है अशिव तुरत निवार दो ।। परिव्याप्त मलिन तत्व गंग से निखार दो ।। स्वर्गिक बना दो पूर्वकाल सी धरा पुनः , या खो...