*मुक्त-मुक्तक : 80 - बचपन में ही.................


बचपन में ही युवायी प्रेम सिक्त हैं बच्चे !
ये किस तरह की गुफ़्तगू में लिप्त हैं बच्चे ?
क्यों इस तरह के वाक़यात पेश आ रहे ?
क्या बाप माँ के प्यार से अतृप्त हैं बच्चे ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
you are right ..
आप भी पधारें
ये रिश्ते ...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !
Unknown said…
BEHAD UMDA ; SHAANDAAR ;KHOOB SOORAT

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