*मुक्त-मुक्तक :79 - उम्र भर इश्क़................


उम्र भर इश्क़ लगा 
सख़्त नागवार मुझे ॥
क़ौमे आशिक़ से ही 
जैसे थी कोई खार मुझे ॥
कितना अहमक़ हूँ 
या बदक़िस्मती है ये मेरी ,
वक़्ते रुख़सत हुआ है 
इक हसीं से प्यार मुझे ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत ही सुन्दर ...

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