*मुक्त-मुक्तक : 77 - फ़कीरी में जो.............


फ़कीरी में जो ख़ुश मत उसको धन-दौलत अता करना ॥
मोहब्बत के तलबगारों को मत नफ़रत अता करना ॥
ख़ुदा क्या किसको लाजिम है बख़ूबी जानता है तू ,
लिहाज़ा माँगने की मत मुझे नौबत अता करना ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

mukeshjoshi said…
बहोत अच्छे हे आपके लिखे मुक्तक व ग़ज़ल हीरालाल जी पढ़ रहा हूँ ओर गौरान्वित हो रहा हूँ,
कम शब्दों में जो आप केहते हे एक अलग बात हे आपकी लेखनी में,,,,,,,
बहुत बहुत धन्यवाद mukeshjoshi जी !

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