Sunday, February 24, 2013

*मुक्त-मुक्तक : 74 - जहां रोना फफक.............


जहाँ रोना फफक कर हो वहाँ दो अश्क़ टपकाऊँ ॥

ठहाका मारने के बदले बस डेढ़ इंच मुस्काऊँ ॥ 

दिमागो दिल पे तारी है किफ़ायत का जुनून इतना ,

जो कम सुनते हैं उनसे भी मैं धीमे धीमे बतियाऊँ ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

2 comments:

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर ....

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

मुक्तक : 941 - बेवड़ा

लोग चलते रहे , दौड़ते भी रहे ,  कोई उड़ता रहा , मैं खड़ा रह गया ।। बाद जाने के तेरे मैं ऐसी जगह ,  जो गिरा तो पड़ा का पड़ा रह गया ।...