*मुक्त-मुक्तक : 74 - जहां रोना फफक.............


जहाँ रोना फफक कर हो वहाँ दो अश्क़ टपकाऊँ ॥

ठहाका मारने के बदले बस डेढ़ इंच मुस्काऊँ ॥ 

दिमागो दिल पे तारी है किफ़ायत का जुनून इतना ,

जो कम सुनते हैं उनसे भी मैं धीमे धीमे बतियाऊँ ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत सुन्दर ....

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