*मुक्त-मुक्तक : 72 - चेहरा ग़मों से.............



चेहरा ग़मों से मेरा लगे यूँ घिरा हुआ ॥
जैसे पका पपीता फ़र्श पर गिरा हुआ ॥
मायूसी-ओ-मनहूसियत से सूख यों लगूँ ,
गन्ना हूँ जैसे चार बार का पिरा हुआ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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