*मुक्त-मुक्तक : 71 - पानी न पीऊँगा..............



पानी न पिऊँगा हो गर शराब सामने ॥
ताकूँ कनेर क्यों हो जब गुलाब सामने ॥
फाँकूँ मैं चने क्यों मैं चाटूँ बस अचार को ,
रक्खे हों तश्तरी में जब कबाब सामने ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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