*मुक्त-मुक्तक : 70 - अब जब दाँत............



अब जब दाँत रहे न बाक़ी पान सुपाड़ी लाये हो ॥
पीने वाला उठ बैठा जब दारू ताड़ी लाये हो ॥
करवाया तब ख़ूब सफ़र पैदल जब छाले पाँव में थे ,
अब क्या मतलब मंज़िल पर तुम मोटर गाड़ी लाये हो ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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