*मुक्त-मुक्तक : 67 - सामान यक़ीनन...............


सामान यक़ीनन कुछ 
कम दाम का निकलेगा ॥
लेकिन कबाड़ में भी 
कुछ काम का निकलेगा ॥
तलवार शिवाजी की, 
टीपू की न मिले पर ,
चाकू, छुरी, सुई, पिन 
हर आम का निकलेगा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Umesh Chandra said…
जबाब नहीँ आपका...पंक्तियां अत्यंत सुन्दर हैँ
धन्यवाद ! Umesh Chandra जी !

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