*मुक्त-मुक्तक : 66 - देखने में सभ्य..................



 देखने में सभ्य 
अंदर जंगली है आदमी ॥

 शेर चीते से खतरनाक 
और बली है आदमी ॥ 

जानवर तो प्रकृति का 
अपनी अनुपालन करें 

अपने मन मस्तिष्क के 
कारण छली है आदमी ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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