*मुक्त-मुक्तक : 65 - काट लो मेरी...............


काट लो मेरी गर्दन को 
तलवार से ॥
कर लो जी भर गुसल 
ख़ून की धार से ॥
जो भी करना है 
खुलकर करो हाँ मगर ,
नाजुकी से बहुत 
और बड़े प्यार से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
बहुत खूब ...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

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