*मुक्त-मुक्तक : 64 - पहना दी उसने...............


पहना दी उसने महँगी 
उँगली में इक अँगूठी ॥ 
मैंने लगा ली उससे 
शादी की आस झूठी ॥ 
सब कर दिया समर्पित 
बदले में उसको अपना ,
इक लोभ में इक भ्रम में 
मेरी ज़िंद टूटी फूटी ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
क्या बात है ...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !

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