*मुक्त-मुक्तक : 63 - जिस तरह से छुपा................



जिस तरह से छुपा छुपा शराब रखते हैं ॥ 

दर्दो ग़म दिल में अपुन बेहिसाब रखते हैं ॥ 

क्योंकि रोने का नतीजा हो सिफ़र हम हँसती ,

दोनों आँखों में समंदर को दाब रखते हैं ॥ 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Pratibha Verma said…
सुन्दर प्रस्तुति ...
धन्यवाद ! Pratibha Verma जी !
Umesh Chandra said…
mat kaho dard kahan nahi hai.....mat sunao nagma vafa ka dil sunna nahi chahta hai...........sunder

धन्यवाद ! Umesh Chandra जी !

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